Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on September 30, 2018 with No comments
कृष्णा तेरे हाथों का स्पर्श
कृष्णा तेरे हाथों का स्पर्श
लौकिक प्रेम जगा रहा है।
सुध-बुध सब खो बैठी मैं
एक ऐसा मदसा रहा है।।
उपर से तेरा मुरली वादन
मेरे कर्णों को वश करे।
तेरी मुरली की ये मधुरधुन
मैं ना सुनूँ तो गश पडे।।
लोक लाज सब छोड़ कर मैं
तेरे पीछे-पीछे विचरण करूँ।
मदहोशी की सी हालत है...
अब तू ही बता मैं क्या करूँ??
-:-स्वरचित-:-
सुखचैन मेहरा 9460914014

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