September 04, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on September 04, 2018 with No comments

कुछ लाइनें व शायरी -2

गुम हो जाती हूँ कभी कभी "पहले प्यार" की यादों में, फिर मरजानी सासू मां मेरा कंधा सहलाकर कहती है....'बहु रशोई में जागे..रोटी पकाले...'।।

सोचा था भूल जाऊंगी तुझे अपने ससुराल जाकर
तेरी जन्मदिन की बधाई ने यादें फिर ताजा कर दीं।।

मेरा मन करता था तुझसे बिछड़ने से पहले ही मुख मोड़ लूं ,
लेकिन तेरी यादों का काफिला मुझे चारों ओर से घेर लेता।।

इतना आसान नहीं है किसी को पा कर खो देना।
दर्द रह-रह कर उठता है, सीने में ज़नाब।।

हद से ज्यादा उदास नहीं हो सकती मैं उनसे
क़्योंकि।मेरे उदास रहने से उनके कई आंसू बे वजह छलक जाते है

✍सुखचैन मेहरा # 9460914014


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