December 31, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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आओ साथी

यादगार बनाते है,
हसीन पलों को।
आओ साथी,
इस साल के अंतिम दिन
आओ साथी ,आ जाओ साथी।

दिल की सुनाते है
एक दूजे को हम
आओ साथी,
आमने सामने बैठकर
आओ साथी, आ जाओ साथी।

चलो आज भूल जाते है
बुरे बीते वक्त को हम।
आओ साथी,
रात गई बात गई कहकर
आओ साथी, आ जाओ साथी।

चलो आज मुस्करा लेते है
याद कर कुछ किस्सों को हम।
आओ साथी,
बतियाते है साथ बैठकर
आओ साथी, आ जाओ साथी

हा, यादगार बनाते है
आज के अंतिम क्षणों को हम।
आओ साथी,
दो पल साथ बैठकर
आओ साथी आ जाओ साथी।

मांग लेते है माफी
एक दूजे को दी निराशा की हम।
आओ साथी,
नही जीना अब दूर रहकर
आओ साथी आ जाओ साथी।

दे देते क्षमा एक दूजे को
जाने अनजाने में की गलतियों की हम।
आओ साथी,
क्या कर लेंगे हम नाराज हो कर
आओ साथी आ जाओ साथी।

शुरू करते है एक नई जिंदगी
पुरानी को अलविदा कह देते है हम।
आओ साथी,
नव वर्ष की सुभकामनाएँ देकर
आओ साथी आ जाओ साथी।

स्वरचित
सुखचैन मेहरा

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