Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on December 28, 2018 with No comments
नया साल मुबारक
नया साल, नई उमंग
नया उत्साह नई तरंग।
मन प्रफुल्लित,
भाव उमड़े है
नए साल के संग।।
नया रंग, नई सवेर
नई पसन्द तारिखों का फेर।
दिल उत्साहित,
है नया साल
ना तेर ना मेर।
नया रास्ता, नई मंजिल
नया कर्म है आशाएं स्वप्निल।
आंखें चंचलित,
अच्छी आदते हो उजागर,
बुरी हो धूमिल।
किसी को हंसाया, रुलाया
दिल दुखाया, माफ करना भाया।
मन क्षमा प्रार्थी,
पिछली बातों का
तुम करना सफाया।
नई सोच, नई जिंदगी
हो नई राह, नई बंदगी।
मन अभिलाषित,
पूरे हो मनोरथ,
आगे की जिंदगी।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा

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