Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on January 15, 2019 with No comments
मेरी ड्रीम मौत
भाग:एक
हमें तो मौत से भी प्यार हो जाये।
अगर वो तेरी गोद मे आकर आये।।
मेरी सासों से एक ही अर्ज है मेरी ।
कि वो आकर निलके गोद में तेरी।।
तब हमें कफ़न की भी जरूर नही होगी।
जब मेरी मौत की गवाह तेरी आंखें होगी।।
भाग:दो
मेरी मरने की चाह भी तब खत्म हो जाएगी।
जब तेरी जान मेरे से पहले ही रीत जाएगी।।
तेरे जाने के बाद मौत से डरने लगा हूँ।
भगवान शिव के घर हाजरी भरने लगा हूँ।।
कहती क्या मांगा तूने उस निराकार रब से।
कि 'अमर हो जाऊं मैं', तुझे देखा है जब से।।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा #9460914014

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