January 30, 2019 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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मैं गलत नही हूँ

मैं गलत  नही हूँ  और  ना  ही  था  कभी
तुम मुझे कभी  गलत  समझना  भी मत।
पछताने के अलावा कुछ हासिल न होगा
पछताएगी   मेरे   प्यार  को  ठुकरा  कर।।

याद  कर  वो  करवा  चौथ  का पूरा दिन
कभी व्रत नही रखा था मैंने, तेरे साथ था।
याद कर वो रात जिस रात उदास थी तुम
वैसे मुझे नींद बहुत आती है, तेरे पास था।।

बीच बीच में झगड़ा भी किया,क्या करता
तुम मेरे प्यार के इजहार पर खामोश थी।
पर झगड़े के  पीछे प्यार  तूने था समझा
सॉरी कहकर, मुझे समझाया, निर्दोष थी।।

याद कर वो तिलकुटा चौथ  का  व्रत भी
चाँद छुपा लिया  था, बादलों ने अंक  में।
चाँद देखे बिन खाना नही खाया था मैंने
लोग *कृत्रिम चाँद देख सो गए थे अंत मे।।

*व्हाट्सएप पर लाइव दिखा चाँद
* चाँद की टिक्की हल्की सी आभास कराती टिक्की

तेरे निजी विचारों से भी असहमत था मैं
पर तुम्हे आपना समझ सहमत हुआ था।
कहा था मैंने की मिल नही पाऊंगा तुम्हें
फिर भी मैंने हमसफर तुम्हे ही चुना था।।

अगर करवाचौथ व  तिलकुटा में सत है
तो वादा है हम दोनों कभी  जुदा न होंगे।
इससे ज्यादा प्यार मैं जता सकता सनम
उम्मीद है अब तो तुम मुझे जान गए होंगे।।

स्वरचित
सुखचैन मेहरा


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