Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on January 31, 2019 with No comments
।।मुक्तक 1।।
बताओ, हम से बढ़कर तुम्हे प्यार कौन करेगा
छोड़ जाने वाले, हर खुशी तेरे नाम कौन करेगा।
तेरी हर एक नादानी, बेसमझी को समझकर
तेरी हर एक गलती को सोचो माफ कौन करेगा।।
।।मुक्तक 2।।
सफर में जरूरत है एक प्यारे हमसफर की
जिंदगी में जरूरी है कभी खुशी कभी गम भी।
अगर जरूरत पड़े तो अपना हल स्वयं ढूंढो,
क्योकि जग में स्वयं के हमसफर है स्वयं हम ही।।
।।मुक्तक 3।।
एक माँ हमारी "सब" जरूरतों का ध्यान रखती है
पर माँ की जरूरतों को कोई विरला ही समझता है।
माँ - बाप जैसा निस्वार्थी कोई नही होगा जगत् में
डांट के पीछे छिपी फिक्र को कोई कोई समझता है।।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा

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