Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on January 17, 2019 with No comments
[1]
पावन पर्व
है मकरसंक्रांति
खुशियों भरा।
[2]
आई लोहड़ी
मिलेगी लकड़ियां
जलेगा चूल्हा
बेफिक्र एक माह
गरीब परिवार।
[3]
मेरे अपने
सब है दूर खड़े
पास पराये
स्वरचित
सुखचैन मेहरा

0 comments:
Post a Comment