July 31, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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जब याद तेरी आती है.....

दिल क्यूँ दुखाती है
तुं  दुर क्यूँ जाती है।(स्वप्न में)
पता है कितना रोता हूँ मैं...
जब याद तेरी आती है।।

तेरी शरारतें, नखरे मंजूर
फिर क्यूँ यूं खफ़ा होती है
पता है अंदर तक टूट जाता हूँ
मैं, जब याद तेरी आती है...।।

मन का कर ले कुछ भी
जो भी तुं करना चाहती है।
तन्हा सा महसूस करता हूँ मैं
जब याद तेरी आती है...।।

परेशान  नहीं  करूंगा  कभी
बस बता दे तुं क्या चाहती है।
किये कर्मों को अक़्सर याद करता
हूँ, जब याद तेरी आती है...।।

पता है स्वर्ग में भी तुम
पल पल आंसू बहाती है।
अब कभी मत रोना यारा
ये* ओर भी ज्यादा रुलाती है।।

*तेरे आंसूं की बूंद

ले ली एक तस्वीर यादों की
उसी के सहारे जी लूं गा मैं।
और किसी को तेरी जगह मैं
सारी उम्र तक नहीं दूंगा मैं।।

(आंसू बंद और मुस्कराहट चेहरे पर आ गयी उसके शायद मुझे रुलाना सच मैं पसंद नहीं करती आज भी वो)

बस यूं ही खुश रह अब तुं
दिल को तसल्ली मिल जाती है।
हां आंसू छुपा लेता हूँ अक्सर
जब याद तेरी आती है ।।

सुखचैन  मेहरा
# 9460914014

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