July 01, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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                    *कुछ तो बात है* (कटाक्ष)

कुछ तो बात है उन भ्रष्टाचारी नेताओं में ।
जो भ्रष्ट हो कर भी देश के कर्णधार कहलाते हैं।।

कुछ तो बात है उन व्यसनी यवनों में ।
जो व्यसनों से घिर कर भी यवन कहलाते हैं।।

कुछ तो बात है उन रिश्वतखोर कर्मचारियों में ।
जो रिश्वत लेकर भी ईमानदार कर्मचारी कहलाते है।।

कुछ तो बात है उन ढोंगी बाबाओं में ।।
जो ढोंग दिखाकर भी भगवान कहलाते हैं।।

कुछ तो बात है उन नशा बेचने वालों में।
जो ऑफिसरों की सह पाकर एक व्यापारी कहलाते है।।

कुछ तो बात है उन .......... बेटियों में।
जो माँ बाप की पगड़ी रुला कर भी बेटी कहलाती है।।

कुछ तो बात है उन बिगड़े हुए बेटों में भी।
जो माँ बाप की बेइज्जती करके भी अच्छे बेटे कहलाते है।।

भाई साहब इन सब में कोई ऐसी बात नहीं है कि लोग इन्हें सलाम करें. इनका अस्तित्व तब तक है जब तक सामने वाले (हम) सह रहे हैं । ये सब लोग तब तक पावर में है जब तक हम चाहते है..वरना इनकी क्या  औकात ....
( * विकास इस बैक*)
लेखकः *सुखचैन मेहरा* , # *9460914014*

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