July 18, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on July 18, 2018 with No comments

वो कहाँ हैं..? वो कहाँ गए..?(एक गुज़रे पल की याद)

आज जब सालों बाद उनकी याद
में इन आंखों में आंसू समा गए..।
तो दिल खुदबखुद पूछ बैठा कि
वो कहाँ गए ... वो कहाँ गए....।।

जानता है और था, ये बेवस दिल
कि वो कहाँ है... और कहाँ गए..।
फिर क्यूँ पुछ बैठा नादाने दिल कि
वो कहाँ है... वो कहाँ गए.....।।

शायद पर्स में छुपाये खत उनके
उनकी याद अचानक दिला गए।
तभी तो मन बावरा विकला उठा
कि वो कहाँ है... वो कहाँ गए...।।

ये समां नहीं उनकी रग दुखाने का
तभी नम नैना वक़्त विचार गए..।
सम्भलता  है  मन  कुछ इस तरह
कि न  नैं  मेरे वहें न उसके वहें।।

*नयन

लेखक: *सुखचैन मेहरा* # *9460914014*

0 comments:

Bookmark Us

Delicious Facebook Favorites More Stumbleupon Twitter

Search