July 17, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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*एक जून दो वलायें (हिंदी संस्करण)*

राज गार्डन में ठंडी ठंडी हवा का लुप्त उठा रहा था, अचानक किसी ने अपने मुलायम हाथों से उस की आंखे बंद दी और कहने लगी कि, स्पोज करो कौन हूँ मैं ??? राज अभी कुछ बोलता उस से पहले कुलदीप(दूसरी लड़की) ने आकर इस लड़की के बाल पकड़ लिए और कहने लगी कि तूने मेरे राज को हाथ कैसे लगाया. वो लड़की  जिसका नाम रजनी था कहने लगी मैं राज को फर्स्ट ईयर से जानती हूँ (अभी भी एक दूसरे के बाल एक दूसरे के हाथों में ही थे। राज धीरे से यहां से निकल गया) (रजनी की टाइट जीन्स से कहीं ज्यादा अच्छा कुलदीप का सलवार सूट लग रहा था बिल्कुल पंजाबी जट्टी और वो विदेशी मेम)
कुलदीप: ऐ, पागल में राज को बचपन से जानती हूँ... एक बात बता तुझे कभी राज ने परपोज़ किया ?
रजनी : नहीं, कभी नहीं.... और तुझे....?
कुलदीप: मुझे भी नहीं किया उस जुर्लु से ने...
(दोनों के हाथ ढीले पड़ गए)
रजनी: देखते है राज किसके हाथ में आता है...
कुलदीप: देख लेंगे फिर...
(इतना कह दोनों अपने-अपने घर चलीं गयीं।)
एक दिन फिर रजनी राज को उसी गार्डन में मिल गयी। राज उठ कर जाने लगा इतने में रजनी ने उसका हाथ पकड़ कहने लगी, 'चल कहीं घूमने चलते है' राज ने एक बार तो मना कर दिया लेकिन  जब रजनी ने अपने बर्थडे होने का हवाला दिया तो राज मान गया । इधर कुलदीप भी राज के पीछे साय की तरह पड़ी हुई थी। वो भी उन दोनों के पीछे चली आयी। जहां वो बैठे थे उसके आस पास कोई नहीं था अगर कोई था भी तो वो काफी दूर था। जब राज और रजनी आपस में बैठे बात कर रहे थे तो रजनी अचानक राज से लिपट गयी राज चाहते हुए भी कुछ ना बोल सका.. और कुलदीप भी अपनी शर्मिंदा नजऱ से उन्हें सामने हो कर भी नहीं देख पायी।(एक कुँवारी लड़की की जवानी की इस बेवसी को देख भगवान भी हड़बड़ा गया होगा। मेरे बनाये हुए लोग प्यार में होश गवा रहे है) राज जैसे ही वहाँ से जाने लगा तो उसकी नजऱ कुलदीप के हाथ में पकड़े गिफ्ट पर पड़ी पूछने लगा..क्या है ये..? कुलदीप ने उस गिफ्ट को अपने पीछे छुपा लिया। राज ने सोचा रजनी के लिए होगा और अपनी कार की ओर बढ़ गया। जब राज जा रहा था तब कुलदीप की नजरों ने राज की शर्ट पर लिप के निशान देखे । वह तुरंत उसके पीछे दौड़ पड़ी लेकिन राज नहीं रुका। फिर कुलदीप ने राज को एक जोर दार आवाज लगाई दी...."हैप्पी बर्थडे राज..."( आवाज पूरे समुंदर व पहाड़ों में गूंज पड़ी । रजनी भी हैरान थी कि आज राज का बर्थडे है और उसे पता तक नहीं) राज रुक गया और कुलदीप ने वो गिफ्ट दे दिया ते अभी खोलने के लिये कहा। राज ने गिफ्ट खोलेकर देखा पेंट-शर्ट थी उसमें। कुलदीप ने शर्ट को हाथों हाथ बदलवा दिया। इस दौरान रजनी की नजरें राज के गठीले बदन को निहार रही थी और कुलदीप की लज्जायी नजरें दूसरी तरफ पलट कर देखने लगी।
राज: Thanks.. कह चला गया।
कुलदीप रजनी को कहने लगी कि, ' शायद तुम राज को ज्यादा प्यार करती हो तभी तो अपना सब कुछ दे दिया तूने उसे एक इज्जत ही तो होती है एक कुँवारी बेटी के पास वो तूने उस पर वार दी। रजनी ये सब सुनकर कुछ नहीं बोली और यहां से से चली गयी।
इधर राज ने अपने माँ-बाप को सब कुछ बता दिया और कुलदीप से शादी करने की इच्छा व्यक्त की । माँ-बाप राजी हो गए लेकिन कुलदीप ने राज का फ़ोन अटेंड करना बंद कर दिया। जिसके चलते राज ने भी कुलदीप को मिस करना बंद कर दिया। फिर एक दिन कुलदीप राज को बाजार में मिल गई वह यहां से जाने लगी लेकिन राज ने एक बात सुनकर जाने को कहा। राज ने उसे एक फिल्मी अंदाज में परपोज़ मार दिया और कुलदीप भी अपने पहले प्यार को मना नहीं कर सकी। कुलदीप ने हां कर दी। पूरे एक साल बाद राज और रजनी के बर्थडे वाले दिन ही शादी थी। रजनी भी आई हुई थी शादी में। राज ने अपनी उस शर्ट (लिप वाली) गिफ्ट कर दी जिसे देख रजनी के गुजरे हुए पल फिर जिंदा हो गए और उसी वक्त कुलदीप के गले में मंगलसूत्र डल जाने के बाद फिर आँखो के आंसुओं में धुल गए।

लेखक *सुखचैन मेहरा* # *9460914014*

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