तेरा यूं रूठ जाना
खोजता हूं रोज तरीके मनाने के तुम्हें
ना मना पाऊं तो खुद ही मान जाना।
मनाना नहीं आता मुझे, मेरे हमदम
पर रुलाता है..तेरा यूं रूठ जाना।।
किसी से पूछुं कि कैसे मनाऊं तुझे?
पर सब जानते है बात को ठठ्ठों में उड़ाना।
मनाना नहीं आता मुझे, मेरे हमदम
पर रुलाता है..तेरा यूं रूठ जाना।।
चलो खुद ही कौशिश करूँगा आगे
तुम भी मेरे कंधे से कन्धा मिलाना।
मनाना नहीं आता मुझे, मेरे हमदम
पर रुलाता है..तेरा यूं रूठ जाना।।
जरा ये फूल 💐 पकड़ो मेरे हाथ से
अब मुझे वापिस देदो मेरी जाने जाना।।
मनाना नहीं आता मुझे, मेरे हमदम
पर रुलाता है..तेरा यूं रूठ जाना।।
ये हुई ना बात, आई तेरे होठों पे मुस्कान
सिख गया हूँ तुम्हें मनाना ? जरा बताना।।
( *उनका जवाब* )
हां.. हां.. पगलेट, आ गया है मनाना तुझे
आगे से नहीं रूठूँगी मेरे जाने जाना।।
सुखचैन मेहरा # 9460914014

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