Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on July 19, 2018 with No comments
*बना इक आईना ऐसा*
हे कारीगर, बना इक आईना ऐसा
जो दिखलाए असलियत बेईमानों की,
राक्षसप्रवर्ति के इंसानों की।।
हे कारीगर, बना एक आईना ऐसा
जो जमीर जगादे रिश्वतखोरों का,
भ्रस्टाचारियों का, चोरों का।।
हे कारीगर, बना इक आईना ऐसा
जो चरित्र दिखलाए लोगों का,
कुछ पाखडींयो का, दारोगों का।।
हे कारीगर, बना एक आईना ऐसा
जो राह दिखलाए यवनों को,
कुछ भटकों को, *रमनों को।।
*खेलने वाले खिलाडियों को
सुखचैन मेहरा #9460914014

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