Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on December 08, 2020 with No comments | Categories: आ0 'राजेश लखेरा' जी, जिंदगी, दिसम्बर 2020, मुक्तक
नमस्कार-कलमरथ मंच
दिन -मंगलवार
मुक्तक
1
बुजुर्गियत के एहसास को खास बनायेंगें।
अपने आशियाने को कभी चौराहा ना बनायेंगे।
आशीर्वाद का हाथ रहे सिर पर और डगर पर,
और जिंदगी साथ रहकर बितायेगें।
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2
गुल-गुलशन, आंगन, दामन महकायेंगें,
होली, दीवाली, सावन में घर आयेंगे।
कभी सरहद तो कभी आंगन पर होगा पहरा,
और जिंदगी साथ रहकर बितायेगें।
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3
पहिया जीवन का हम यूं घुमाते जायेंगे,
कभी आप तो कभी हम मुस्कुराते जायेंगे।
झुकें दोनों तरफ तराजू के पलड़े जीवन के,
और जिंदगी साथ रहकर बिताते जायेंगे।
राजेश लखेरा,जबलपुर।

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