December 03, 2020 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments Posted in , , ,
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on December 03, 2020 with No comments | Categories: , , ,
कलम रथ दैनिक आयोजन 2020
क्रं. संख्या 57
विषय .तब भगवान याद आते हैं
विधा. कविता
दिनांक 3/12/2020
दिन गुरुवार
क्रमांक 76


आज का मानव खुद को भगवान समझ बैठा है
हर काम करके कहता ये मैने कर लिया॥
ये मैंने बनाया है ये मैने किया है।
अपनी मेहनत से मैंने सब कुछ बनाया।
बीमारी के वक़्त मैं डॉक्टर इलाज करते
और थक जाते हैं तब डॉक्टर को भी
भगवान यादआते हैं और कहते हैं भगवान
से प्रार्थना करो वही कुछ कर सकते हैं।
आविष्कार किये इतने दिल बना लिया
कृतिम बना लिये पैर हाथ फिर भी
वह नहीं समझ सका शरीर में कैसे
आतहैं प्राण कैसे जाते हैं प्राण।
सुख में कभी नहीं करते भगवान को याद
आती है जबआदमी पर मुसीबत
 तबभगवान याद आते हैं।

स्वरचित मौलिक रचना कलमरथ परिवार को प्रकाशन की अनुमति है।

नरेन्द्र श्रीवात्री स्नेह
मण्डई
तह.बिरसा
जिला बालाघाटमध्यप्रदेश
पिन. 481051

0 comments:

Bookmark Us

Delicious Facebook Favorites More Stumbleupon Twitter

Search