Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on December 03, 2020 with No comments | Categories: आ0 'अभिषेक मिश्रा' जी, कविता, दिसम्बर 2020, भगवान
नमन मंच: कलम रथ
विषय:तब भगवान याद आते हैं
विधा: मुक्तक
जब हम कभी मुश्किल में खुद को पाते हैं
और कोई नहीं आता तब भगवान याद आते हैं,
चाहे ग्रंथ कोई भी पढ़े न पढ़े पर ये सभी बताते हैं,
और कोई नहीं आता है तब भगवान याद आते हैं!!
मेरे बच्चे कैसें हैं इंसान याद आते है
अपना घर अपना मकान याद आते है,
कोई बदनसीब न हो जहां में मेरे जैसा
भूख लगती है मुझे तब भगवान याद आते हैं!!
स्वरचित,अभिषेक मिश्रा
बहराइच उत्तर प्रदेश
मौलिक अप्रकाशित
स्वरचित:

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