December 03, 2020 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments Posted in , , ,
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on December 03, 2020 with No comments | Categories: , , ,
#कलम रथ साहित्य मंच को नमन।
#कलम रथ दैनिक आयोजन क्रम संख्या 57.
#दिन : गुरुवार।
#दिनांक : 03 दिसंबर 2020.
#विषय : तब भगवान याद आते हैं।
#विधा :  पद्य।

     ।रचना।


यह संसार,
एक माया नगरी,
हवा महल।

जब उलझे,
तब ही भगवान 
याद आते हैं।

ख्वाबों के लिए,
यहां सब बिकल,
है कोलाहल।

आंखें बोझल,
मादक है दुनिया,
नशे में सब।

मिलती नहीं,
किसी को भी यहां जो,
सोचा था कल।

चल निकलो,
भगवान साथ हैं,
सब संभव।

आगे तो चल,
मिल जायेगी तेरी,
खोई मंजिल।

स्वरचित, मौलिक और अप्रकाशित।

                       दामोदर मिश्र बैरागी,
                       मेदनीनगर, झारखण्ड।

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