Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on December 03, 2020 with No comments | Categories: आ0 'सतीश बब्बा' जी, कविता, दिसम्बर 2020, भगवान
नमन मंच कलम रथ
विषय - तब भगवान याद आते हैं
#कविता
3 - 12 - 2020
क्रमांक 57
#सतीश "बब्बा"
जब अपने ऊपर कोई,
मुसीबत आती है,
अपने हमें दुत्कार देते हैं,
तब भगवान याद आते हैं!
जब सभी आशाभंग होती हैं,
जब आशा निराशा में बदल जाती है,
जब सभी दरवाजे बंद हो जाते हैं,
तब भगवान याद आते हैं!
जब सारे काम बिगड़ जाते हैं,
जब कोई सहारा नहीं दिखता है,
जब अपने साथ छोड़ जाते हैं,
तब भगवान याद आते हैं!
जब यमराज पास आते हैं,
बचने के रास्ते नहीं दिखते हैं,
जब अपने नहीं पास होते हैं,
तब भगवान याद आते हैं!!
रचना मौलिक एवं अप्रकाशित है।
सतीश "बब्बा"
कोबरा, चित्रकूट, उ प्र, 210208.
मोबाइल - 9451048508.

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