Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on December 03, 2020 with No comments | Categories: 07. डॉ0 'दविना दिवि' जी, कविता, दिसम्बर 2020, भगवान
नमन मंच
#क़लम रथ परिवार
#दिनांक:3.12.2020
#विधा: पद्य
#विषय : तब भगवान याद आते है
आँख खुलते ही,निकलकर सपनों की दुनिया से
पाँव पड़ते हैं जब ज़मीं पर,होता सच से सामना
तब भगवान याद आते हैं
नव सृजन,नव दिवस,नया जोश
सूर्य की पहली किरण का आभास
उसी ने दिया ,नई ज़िंदगी का आयाम
तब भगवान याद आते हैं
खिलती कलियां,बनते फूल,भँवरों की गुंजार
कोमल पत्तियों पर सुनहरी ओस की बूँद
शीतल ,मंद- मदं बहती बयार
स्कूल जाते ,छोटे-छोटे बच्चे ,भारी बस्ते
तब भगवान याद आते है
तपती दोपहरी ,भारी बोझ पसीने से तर बतर नर-नारी झुलसता बचपन,नंगे पैर ,प्यासे पशु-पक्षी
तब भगवान याद आते हैं
थक-मांदा ,ख़ाली हाथ लौटता मजबूर
लौटते पक्षी एक क़तार में,अनुशासित
गोधूली की बेला ,सूर्यचांद की लुका-छिपी
दूर क्षितिज पर ,धरती अम्बर का मिलन
तब भगवान याद आते हैं
स्वरचित व अप्रकाशित रचना
डॉ दवीना अमर ठकराल
हिसार हरियाणा

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