December 03, 2020 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments Posted in , , ,
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on December 03, 2020 with No comments | Categories: , , ,
नमन मंत्र
वेश्या__ तब भगवान याद आते हैं
जब चल रहे हो सीधे
मंजिल ना ढूंढ पाते हैं
सच कहती हूं दोस्तो
तब भगवान याद आते हैं
जब मिल रही हो खुशियां
मस्ती में मौज उड़ाते हैं
खुदा क्या खुदी को
हम भूल जाते हैं
पर पड़ जाते हैं मुश्किल में
तो सच कहती हूं दोस्तो
तब भगवान याद आते हैं
जब अपने अपनों का
गला घोट जाते हैं
अपनों की मार से
दर्द में तड़फ कर
जख्म हरे हो जाते हैं
सच कहती हूं  दोस्तो
तब भगवान याद आते हैं
 उर्मिल शर्मा
प्रवक्ता हिंदी
सिरसा हरियाणा

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