Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on December 03, 2020 with No comments | Categories: आ0 'अंजली रॉय' जी, कविता, दिसम्बर 2020, भगवान
नमन मंच 🙏
#कमल रथ
#दिनांक-03/12/2020
#दिन-गुरुवार
#विषय-तब भगवान याद आते हैं
#विधा-कविता
शीर्षक-´´तब भगवान याद आते हैं``
घोर संकट विपदा भारी,
मुँह फेर ले दुनियाँ सारी !
बन जाएँ अपने भी बेगाने,
नजर ना आए रास्ते सारे !
तब भगवान याद आते हैं |
रास्ते बंद हो जाएँ सारे,
घिर जाएँ संकट के बादल !
नजर ना आए कही अपनापन,
भूल जाएँ अपने भी सारे !
तब भगवान याद आते हैं |
निराशा के चँगुल में फँसा मन,
दूर तक ना दिखे आशा की किरण !
अंधकारमय जीवन हो जब,
पर जाएँ मुश्किल में जब मन !
तब भगवान याद आते हैं |
आशा निराशा के भँवर में मन,
चिंताओं से घिरा मन हो जब !
दुख का पहाड़ टूट पड़े सर,
कोई राह नजर ना आए जब !
तब भगवान याद आते हैं |
मन में इच्छा अभिलाषा हो,
कामना हो कुछ जब पाने की !
साथ ना दे किस्मत अपनी,
नीरस लगे जब जीवन यह !
तब भगवान याद आते हैं |
जब कोई रास्ता ना सूझे,
दमन करना पड़े इच्छाओं का !
हास उपहास मिले जब अपनों से,
खुद का अपमान हो दुनियाँ से !
तब भगवान याद आते हैं |
मन में हो भक्ति भावना,
श्रद्धा हो ईश्वर के प्रति !
कृपा हो भगवान की जब,
खुशियाँ मिले भगवान के अनुराग से !
तब भगवान याद आते हैं ||
अंजली रॉय
समस्तीपुर, बिहार
स्वरचित व मौलिक रचना

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