Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on June 24, 2018 with No comments
प्यारी बहना
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ें*
मेरे हाथ से मिठाई की एक टुकड़ी छीन के भाग गयी.....मेरी छोटी बहन | मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने उसे डांट दिया सिर्फ एक मिठाई के टुकड़े के पीछे.... वो रोने लगी | अरे! क्या हो गया विशु तूं रो क्यूँ रही है ?? ये मेरी माँ की आवाज थी | जैसे ही विशु (वर्षा) ने मेरी शिकायत के लिए मुहं खोला....मैंने अपने हाथों से उसका मुहं बंद कर दिया....तूं पूरा डिब्बा लेले मिठाई का पर माँ को मत बताना| वो झट से मान गयी| लेकिन मैंने उसे डिब्बा नहीं दिया..वो फिर चिलाने लगी तो मैंने तीन टुकड़ियों वाला डिब्बा वर्षा के हवाले कर दिया | फिर मैंने कहा एक....टुकड़ी तो देदे ....| वो उसने सिर ना में हिलाते हुए कहा नहीं......क्योंकि मुंह में टुकड़ी ठूस रखी थी उसने | मैंने उसे फिर कहा देदे ना.. | ऊंहू....नहीं....| इतने में मेरी माँ आई और क्या हुआ रो क्यूँ रही थी..? | मैंने उसके आगे हाथ जोडकर इशारा किया कि मत बता प्लीज्....| उसने फिर भी कहा.. माँ में भैया को रो कर दिखा रही थी एक्टिंग कर रही थी | हाँ, वर्षा को एक्टिंग व मिमिंग का बहुत शोंक है | तूं जरुर बनेगी एक्टर| मुझे ऐसा लगा कहीं सच में रो रही है| बल्कि वर्षा तो सच में ही रोई थी| माँ के जाते ही मैंने जैसे मैंने मिठाई की टुकड़ी उठानी चाही वैसे ही वह थोड़ा पीछे हती तो उसका संतुलन बिगड़ने पर वो निचे गिर गयी | उसका सर चारपाई की कोर से जा टकराया | खून काफी बहना शुरू हो गया था | मैंने जल्दी सी मेरी बाइक उठाई और उसे नजदीकी चिकित्सा केंद्र में ले गया | जब उसे होश आया तब जाकर मुझे मेरी जान में जान आयी | उठते ही मिठाई का पूछने लगी इशारा करके... मैंने हाँ का इशारा किया और घर पर होने का कहा | और मम्मी पापा ने मुझे खूब सुनाई लेकिन वर्षा के रोने पर शांत हो गये | मेरी आँखों में आंसू थे पापा की डांट के नहीं बल्कि बहन के चोट लगने के थे । कहने लगी भैया सॉरी..... मैंने अपनी मिठाई खा ली थी फिर भी मैंने आपकी मिठाई के लिए जिद्द की | मैंने कौनसा मिठाई खा रहा था मैं तो तुझे थोड़ा सा तंग कर रहा था जब तूं मेरी शिकायत लगाती है ना मुझे मजा आता है.... मैंने कहा | तूं तो मेरी प्यारी बहना है आज से जो मांगे गी वो लाकर दूंगा | बोली... मिठाई दे फिर वो...(सब हंसने लगे) | चल घर पर देता हूँ (मैंने हँसते हुए कहा)|
(तो दोस्तों आप सब को पता है कि भाई-बहन का रिश्ता कितना प्यारा होता है लेकिन यह भी सच है कि जब तक दोनों एक दुसरे से झगड़ ना लें तो भी चैन नहीं आता है | ये कहानी आप सब को कैसे लगी कमेंट कर जरुर बताना||)
लेखक: सुखचैन मेहरा , # 9460914014

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