Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on June 18, 2018 with No comments
अच्छा चुनो, अच्छा भुग्तो (चुनाव स्पेशल)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना*
अपने देश के संविधान में
जनता के विकास के लिए हर पांच साल बाद चुनाव होते है| प्लीज इसे हर साल बाद कर
दिजिये | माना कि यह संभव नहीं है| लेकिन देश के राजनेताओं ने ये सोचने पर मजबूर
कर दिया है| जनता को सिर्फ एक साल ही मिल पाता है विकास के लिए बाकी के चार साल तो पता ही नहीं चलता कि हमारे राज्य में कोई
नेता है भी या नहीं | लेकिन जब चुनाव नजदीक आ ते है तो हम उनको गिण तक नहीं पाते
क्यों.... ?
मैं और मेरा दोस्त बाज़ार की
ओर निकले रस्ते में लोग नारे बाजी कर रहे थे कि हमारी मांगे पूरी करो? मुझसे ये सब
देखा नहीं गया और मैंने उनसे माइक लिया और पता नहीं क्या-क्या बोलना शुरू कर दिया|
मैंने किसके आगे गुहार कर रहे हो आप अपनी मांगे पूरी करने की है जिसे आपने चुना है
| जब आपको कहा गया था कि मैदान में इतने सारे नेता है चुन लो कोई भी अच्छा लगता
है| तब तुम्हारी अक्ल घांस चरने गई थी| वास्तव में हम उन्ही के आगे हाथ फैला रहे
है जिनको हमने खुद चुना है | चुना है तो भुग्तो| सारे के सारे चुप हो गये | लेकिन
किसी एक ने आगे आ कर बोला, भाई साहब हमारे मुह्ल्ले में शराब के बदले वोट... मैंने
उसे इतना ही बोलने दिया| कहा.. ‘पता है भाई सब पता है| जब ‘बेटा’ बिगड़ता है ना
उसमें उस बेटे की कोई गलती नहीं होती बाप की गलती है कि उसको सर पर चढ़ा रखा था| नहीं
तो बेटे की क्या हिम्मत कि वो अपने बाप से बगाबत करे| सभी ने अपनी-अपनी
तख्तियां ली और घर की ओर चल पड़े| हम चल पड़े मेरे दोस्त ने कहा यार दो दिन और हड़ताल
रहती तो बढिया था छुट्टी तो मिलती | मैंने कहा बुला ले दोबारा सब | वो भी हस पड़ा |
सही है हम अपने ही चुने हुए नेता के आगे हाथ
क्यों फैलाएं |
अच्छा चुनो, अच्छा भुग्तो
लेखक: सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र : 9460914014

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