June 04, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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टूटी चश्मा (एक अनोखी प्रेम कहानी)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ें*
क्या कभी किसी को पहली नजर में प्यार हो सकता है...? खासकर किसी लड़की को | हो सकता है या नहीं ये तो मुझे नहीं पता लेकिन लव स्टोरी में अंजली की एंट्री तो बड़े दमदार तरीके से हुई | चलिए देखते है क्या हुआ उस दिन |
अंजली अपनी दो-तीन दोस्तों के साथ स्कूटी पर मस्ती करती हुई आ रही थी रस्ते में एक युवक को छेड़ने की नियत से वो कभी स्कूटी को युवक की साइकिल के बिल्कुल आगे ले आये तो कभी उसके बिल्कुल पीछे | युवक कभी अपनी साइकिल को कभी स्लो करे तो कभी तेज| परेशान हो कर भी उस ने उन लडकियों को कुछ नहीं कहा | कहता भी क्या लडकियों का मामला जो था | थोड़ी देर तो ये सब चलता रहा | इस बीच जब अंजली एंड पार्टी उस लडके के मजे लेते हुए उसकी साइकिल के बिल्कुल पीछे चल रही थी, हॉर्न पे हॉर्न बजा रही थी तब युवक ने अपनी साइकिल की स्पीड कुछ बढ़ा ली | इस कारण बीच रास्ते में ही साइकिल की चैन उतर गयी और अंजली एंड पार्टी समेत स्कूटी साइकिल में जा लगी| जिससे अंजली उस युवक के उपर जा गिरी | युवक उसको उठने का इशारा कर रहा था लेकिन वो पता नि कहाँ खो गयी थी शायद चश्मिश(चश्मा टूट गई थी) के बेबस चेहरे को निहार रही होगी | जब उस युवक ने उसे धक्का देकर उठाया तब वह हडबडाकर उठ गयी| घनिमत रही कि किसी को कुछ नहीं हुआ सिवाए साइकिल के टायर फटने के | हाँ, युवक के जरुर थोड़ी सर पे चोट लग गयी थी| अंजली ने झट से अपना दुप्पटा उतारा और उसके सर पे बांध दिया | जब अंजली ने उसे पैसे देने चाहे तो उसने पैसे लेने से मना कर दिया|  | जो कि उसको और भी आकर्षक बना रहा था उपर से वो टूटी चश्मा से उसे देखकर मुस्करा रहा था | अंजली का उसे इस हालत में छोडकर जाने का दिल नहीं कर रहा था| लेकिन उस युवक के समझाने पर वो चली गयी| वो घर पर चली तो गयी लेकिन अभी उसका गोलमटोल चेहरा टूटी चश्मा उसकी आँखों से हट ही नही रहा था | माँ एक आवाज तक नहीं सुनाई दे रही थी उसे | फिर दुसरे दिन भी वह उसी समय साइकिल पर आ रहा था लेकिन अंजली को देख वह साइकिल को एक साइड में रोक देता है (ख़ास लहेजे से उनकी ऑर देखते हुए और उनको आगे जाने के लिए कहता है (हाथों के इशारे से)| ऐसा कुछ दिनों तक चलता रहा वो लड़का साइकिल रोकता रहा ऑर वो उसे मन में ही झल्ला (ख़ास लहेजे से) कहकर स्माइल पास करके चली जाती | एक दिन अंजली ने हिम्मत जुटाकर उसे वहीं उस जगह पर अपने प्यार का इजहार कर दिया | (आज उसकी सहेलियां साथ में नहीं थी |) लड़के ने ‘हाँ’ कहने से पहले अंजली से पूछा(मजाकिया अंदाज में) कि, ‘ दोबारा स्कूटी तो नहीं मरोगी..?’ | 
अरे! पागल नहीं मारूंगी |
उसने वो टूटी चश्मा निकाली और पहन ली | दोनों हंस पढ़े इस तरह से अब वो रोज कहीं ना कहीं मिलने लगे| अंजली ने तो उस लड़के का सारा गेटअप ही बदल दिया| मोल से अच्छे सूट-बूट दिलाकर एकदम हीरो बना दिया लेकिन उसकी टूटी चश्मा नहीं बदली | जो कि वो सिर्फ  अंजली के सामने ही पहनता था और खूब हँसता|
                                         लेखक : सुखचैन महरा सम्पर्क सूत्र : 9460914014

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