Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on June 16, 2018 with No comments
लो हो गई ख़त्म हड़ताल (राजनैतिक हलचल)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना*
*मैं :*
लो हो गई खत्म हड़ताल
क्या मानी कुछ सरकार.?
या यों ही बे - कार गया
ये बे समझी का विचार.. ||
*हड़ताली:*
घणी सब्जी खिलारी और
दूध गलियाँ मयं उड़ेला रे
मारे काइं फर्क पड़नो हो
म्हारे कने कोणी धेला रे ..||
(मतलब इस हड़ताली के पास जमीन नहीं थी)
मैं :
(फिर)क्यों लोगों का मन दुखाया
तूने दूध गलियों में बहाया |
गरीबों पर तरस ना आया.
क्यों किसान नाम डुबाया..||
*हड़ताली:*
मस्ती सागे पिसा मिल्या
अखबारां में फोटो आया रे |
वे पिसा वोट तोड्न गा था
मेंह किसान ने ढाल बनाया रे ||
*मैं :*
क्यों पानी हुआ दूध माँ का
तूने जमीर मार गिराया है |
क्या मकसद जग में आने का
बता तूने कितना निभाया है ?||
*हड़ताली:*
जमीर जगाया मेरे अंदर गा
तेरा बोल तीर सा लाग्या रे |
मैं सोयो पड्यो 45 सालां गो
कदी गाव म्हारे विराज्या जे |
*मैं:*
मैं छोटो सो लेखक रे भायां
बस सोच बदलने री सोची है...|
के ले ल्यो गा बेमानी करगे
जद खानी दो वक्त री रोटी है ||
*हड़ताली :*
बेटा एक्लो कोणी रियो तूं
अब मैं भी तेरे सागे हूँ ..|
100 बन्दा जागे गा अब
बस एक मिनख रे जगे सूं||
*लेखक : सुखचैन मेहरा* सम्पर्क सूत्र 9460914014

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