June 20, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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खराब-है-हालत (एक वार्तालाप)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना*
मैं
खड़ी द्वार पर एक गाय
दोउ आँखों में आंसू लिये |
क्या हुआ आज आपने...
तुम्हें ये आंसू किसने दिए ||  

गाय
तूने ही आज देखे है बेटा
आज के नहीं वर्षों से है..|
हालत बिगड़ रहे है हमारे
इसलिए आये सड़कों पे है ||

मैं
क्या-क्या सहना पड़ता है
तुम्हें बता दो जमाने को |
मैं लिखूंगा आपके लिए..
तेरे हरेक वयाननामें को ||

गाय
ले सुन खराब-है-हलात मेरे
लोग दूध पी छोड़ देते है...|
किसी काम की नहीं रहती
तो चमड़ी ही उधेड़ लेते है ||

मैं
सरकार की काफी योजनायें
तो फिर क्यों ऐसा होता है |
बतायो तेरा घर है गौशाला
क्या उसमें भी ऐसा होता है||

गाय
हाँ, सरकार ने की है मदद
ठेकेदार पर ही छोड़ देते है|
मेरे घर में जितना खिलाते
उससे ज्यादा निचोड़ लेते है||

मैं
गिर चुकी है कलम मेरी दो
बार तेरी ये कहानी सुनकर |
लेकिन उभरूंगा अब मैं माता
तेरा सहायक तानी बनकर ||

गाय
ठीक है तूं भी कर कौशिश
मैं भी हिम्मत करती हूँ...|
धन्यवाद बेटा तूने समझा
अब अगले द्वार चलती हूँ ||

                              लेखक: सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र : 9460914014

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