April 29, 2018 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on April 29, 2018 with No comments

सस्ते रिश्ते (एक सच)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ें*
आलू दस रूपये किलो....आलू दस रूपये किलो....आ जाओ भाइयों.....आ जाओ.. आवाज ने हमारा ध्यान आकर्षित किया और मेरा दोस्त बोला चल खरीद लेते है | आगे चलकर क्या देखते है कि वह सब्जी वाला अपनी रेहड़ी पर छोटे-छोटे आलू बेच रहा था | मैंने अपने दोस्त से कहा नहीं यार ये किसी काम के नही है... लेकिन मेरा दोस्त कहने लगा महंगाई बढ़ गयी है भाई 30 वाले 10 में दे रहा है तो इसमें क्या दिक्कत है...मैंने कहा चल लेले भाई , लेकिन महंगाई नहीं बढ़ी है| मेरे दोस्त ने पूछा  वो कैसे......? जब से पैसा महंगा हुआ है रिश्ते बहुत सस्ते हो गये है | एक टूटता है तो दूसरा जोड़ लिया जाता था | मेरा दोस्त सब्जी वाले को पैसे देकर वहां से बिना सब्जी लिए निकल गया मेरी ओर देखते हुये कि ये इसने क्या कह दिया (आप फ़िक्र मत करो सब्जी मैं लाया था)| यदि आपको समझ आ गया है तो आप कोमेंट कर जरुर बताना कि मैंने जो कहा है वो सही है या गलत.....                              
लेखक: सुखचैन मेहरा सम्पर्क सूत्र: 9460914014  

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