Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on April 01, 2018 with No comments
सख्ताई (एक अनहोनी का अंदेसा)
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना*
कुछ लोग अपने परिवार को चलाने के लिए अपने परिवार वालों से इतनी सख्ताई से पेश आते है
कुछ लोग अपने परिवार को चलाने के लिए अपने परिवार वालों से इतनी सख्ताई से पेश आते है
कि उनके परिवार वाले उनसे दूरियां
बनाना ही उचित समझते है | जब भी उन्हें मौका मिलता है
उनसे दूर रहकर कुछ करने मस्ती करने का मौका तो वह कभी नहीं चूकते | इस तरह जैसा परिवार का
मुखिया चाहता है उसके बिल्कुल उल्टा होना शुरू हो जाता है | मुखिया चाहता है कि उसके परिवार
वाले अकेले कहीं गुमने न जाए ये कपड़े न पहने वो कपड़े न पहने, किसी अजनबी से बात न करे
तो मौका मिलते ही उसके परिवार वाले वो सब कुछ करते है जो मुखिया को पसंद नहीं | फिर क्या
फायदा ऐसी सख्ताई का....? यदि सख्ताई करनी है तो अपने परिवार वालों को अकेला मत छोडो
उन्हें हमेशा अपने साथ लेकर चलो अकेला छोड़ते ही सब कुछ उल्टा हो जायेगा मेरा कहने का
मतलब है उन्हें बराबर प्यार भी करें जिससे वह आपसे दूर नहीं हमेशा आपके पास रहना अच्छा
लगे | नहीं तो प्यार से रहें अपने परिवार के साथ कोई दिक्कत नहीं आयेगी | और सभी परिवार
वालों से अर्ज है कि भगवान ने आपको एक-दुसरे के लिए बनाया है तो एक-दुसरे के अरमानों की
कदर करें सब कुछ ठीक चलेगा | लेकिन फिर भी कोई दिक्कत आती है तो उसमें एक की गलती
नहीं है दोनों ही बराबर जिम्मेदार हो | किसी एक जीवन साथी से अनजाने से कोई गलती हो भी
जाए तो वह अपने जीवन साथी की आखों में आँखे डालकर वादा करे की वह आगे से ऐसा कभी नहीं
करेगा/करेगी सिर्फ आपका/की हो कर ही रहेगा/रहेगी |
उनसे दूर रहकर कुछ करने मस्ती करने का मौका तो वह कभी नहीं चूकते | इस तरह जैसा परिवार का
मुखिया चाहता है उसके बिल्कुल उल्टा होना शुरू हो जाता है | मुखिया चाहता है कि उसके परिवार
वाले अकेले कहीं गुमने न जाए ये कपड़े न पहने वो कपड़े न पहने, किसी अजनबी से बात न करे
तो मौका मिलते ही उसके परिवार वाले वो सब कुछ करते है जो मुखिया को पसंद नहीं | फिर क्या
फायदा ऐसी सख्ताई का....? यदि सख्ताई करनी है तो अपने परिवार वालों को अकेला मत छोडो
उन्हें हमेशा अपने साथ लेकर चलो अकेला छोड़ते ही सब कुछ उल्टा हो जायेगा मेरा कहने का
मतलब है उन्हें बराबर प्यार भी करें जिससे वह आपसे दूर नहीं हमेशा आपके पास रहना अच्छा
लगे | नहीं तो प्यार से रहें अपने परिवार के साथ कोई दिक्कत नहीं आयेगी | और सभी परिवार
वालों से अर्ज है कि भगवान ने आपको एक-दुसरे के लिए बनाया है तो एक-दुसरे के अरमानों की
कदर करें सब कुछ ठीक चलेगा | लेकिन फिर भी कोई दिक्कत आती है तो उसमें एक की गलती
नहीं है दोनों ही बराबर जिम्मेदार हो | किसी एक जीवन साथी से अनजाने से कोई गलती हो भी
जाए तो वह अपने जीवन साथी की आखों में आँखे डालकर वादा करे की वह आगे से ऐसा कभी नहीं
करेगा/करेगी सिर्फ आपका/की हो कर ही रहेगा/रहेगी |
लेखक: सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र:- 9460914014
एक समझावे.......
दूजा समझे |
एक गल कहजे
दूजा..... मनजे |
एही रिश्ते दिल दे ने... ऐसे
सज्जन जिन्दगी दे विच किस्मत नाल ही मिलदे ने..

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