Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on April 20, 2018 with No comments
वो अपना सा (एक
बैचेन दिल का ख्याल)
*दो मिनट का समय
निकालकर जरुर पढ़ना*
बाहर से भागी आई और शीशे से थोडा आगे निकल गयी लेकिन उसी क्षण वापिस शीशे के
सामने आ बैठी | और खो गयी उसके ख्यालों में कुछ इस तरह....... पागल सा बुलाता
भी कभी..सारा दिन किताब हाथ में लिए घूमता रहता है...ऊपर से वो गोल चश्मा ओर पहन लेता है मेरे दिल की धडकने बढ़ाने के लिए
| एक दिन तो गिर ही गयी थी उसे देखते देखते और मजाक बन गयी थी पुरे कॉलेज का |
इतने में पीछे की दीवार में टंगी माँ की तस्वीर शीशे में से दिख गयी| क्या सुन रही
है माँ.....? हां माँ सच में बहुत अच्छा है वो.....नारी जात की तो बहुत इज्जत करता
है | इसी कारण हमारे कॉलेज की लडकियाँ उसके आस-पास मंडराई रहतीं है | बस यही सब
कुछ मुझे बहुत खराब लगता है| लेकिन जब वह उनसे दूर जा कर बैठ जाता है न तब मुझे
अच्छा भी बहुत लगता है | (खुला दरवाजा देख व् सुनैना की हल्की-हल्की आवाजें सुन उसकी
माँ बिना दरवाजा खटखटाये अंदर चली आई) पर अपने तो ख्याल तस्वीर से हटकर फिर कॉलेज
में चले गये... अरे यार, कभी बुला भी लिया कर जर्लू...... अपने माँ-बाप की चिंता
को छोड़ मेरी ओर भी ध्यान दे लिया कर कभी..सुनैना की माँ ये सब सुन रही थी.और पूछ
बैठी, ‘तूं किसे कह रही है ये सब कुछ’...? (लेकिन सुनैना उसके ख्यालों में इतनी खोई हुई थी कि उसे अपनी माँ की आवाज भी तस्वीर
से आती हुई सुनाई दी....और) सुनैना कहने लगी
माँ वही जो मुझे हरदम हरपल अपना सा लगता हैमाँ : कौन अपना सा....?
सुनैना : अरे, माँ वही जो मेरे दिल का राजा बन बैठा है.....
माँ : कौन बन बैठा है..? बता तो सही....!सुनैना : अरे माँ.. वही जो..................| (सुनैना ने अपनी माँ को देख लिया) और कोई नहीं माँ कह कर बाहर बरामदे में भाग आई (बाद में उसके बारे में सब कुछ बता दिया..) माँ झलाई सुनैना की बात सुनकर अभी भी मुस्करा रही थी.....तो दोस्तों कैसी लगी मेरी ये काल्पनिक कहानी कमेंट करके जरुर बताना और ‘वो अपना सा’ पार्ट दूसरा फिर लेकर हाजिर होऊंगा तब तक के लिए सतश्री अकाल, राम-राम... रब राखा...
लेखक:
सुखचैन मेहरा सम्पर्क
सूत्र 9460914014,सुनैना : अरे, माँ वही जो मेरे दिल का राजा बन बैठा है.....
माँ : कौन बन बैठा है..? बता तो सही....!सुनैना : अरे माँ.. वही जो..................| (सुनैना ने अपनी माँ को देख लिया) और कोई नहीं माँ कह कर बाहर बरामदे में भाग आई (बाद में उसके बारे में सब कुछ बता दिया..) माँ झलाई सुनैना की बात सुनकर अभी भी मुस्करा रही थी.....तो दोस्तों कैसी लगी मेरी ये काल्पनिक कहानी कमेंट करके जरुर बताना और ‘वो अपना सा’ पार्ट दूसरा फिर लेकर हाजिर होऊंगा तब तक के लिए सतश्री अकाल, राम-राम... रब राखा...

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