February 22, 2019 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments
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वादा

ओ सनम मैंने हमेशा शर्तें मनवाई है तुमसे
आज एक वादा भी करूँगा।
जिंदगी के हर मोड़ पर
तेरे संग खड़ा रहूँगा।
मैं जो तुझ से चाहता हूँ,
वो मैं स्वयं तेरे लिए भी करूँगा।
कभी अकेला ना छोडूंगा तुम्हें
जिंदगी की राहों में,
तुझे ता उम्र प्यार करता रहूँगा।
जहाँ तुझे मैं गलत लगूँ, बेशक चेता देना
चेताने का हक भी मैं तुझको दे दूँगा।
तुम हमेशा मेरा साथ दोगे, मेरे संग रहोगे
ये विश्वास में आंख बंद करके करूँगा।
जिंदगी के हर दुख सुख के मोड़ पर
मैं हमेशा संग तेरे रहूँगा।
हा मैं हमेशा तेरे संग हमेशा
तेरे साये की तरह रहूँगा।

स्वरचित
सुखचैन मेहरा


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