शहीद का बेटा
पापा आप तो जल्दी आने वाले थे
मुझे नए खिलौने दिलवाने वाले थे।
मेरी बहना के लिए एक फ्लॉग सूट
मेरे लिए गम स्टेशन लाने वाले थे।।
शाहिद
बेटा आ तो गया, मैं काम देश के
शिकार हुए हम, राजनीति द्वेष के।
खिलौने तेरे राह में बिखर गए बेटा
ला रहा था मैं तो घोड़े लम्बी रेस के।।
शहीद का बेटा
पापा कौन दिलायेगा खिलौने, सूट
मुझे कौन मनाएगा, गर गया रूठ।
सत्य का मार्ग मुझे कौन बताएगा
क्या वो जो बोल रहे है आज झूठ*।।
(लोग दिलासा दे रहे थे कि कुछ नहीं हुआ तेरे पापा को बीमार है)
शहीद
मेरा बहादुर बेटा खुद काबिल बनेगा
पापा की बताई राह पर चलेगा।
किसी और सहारे की जरूरत नहीं
अब परिवार का सहारा तू ही बनेगा।
शहीद का बेटा
हा पापा मैं खुद एक फौजी बनूंगा
मैं भी सरहद पार जा कर लड़ूंगा।
माँ, छोटी का रखूंगा मैं ख्याल
दुश्मन की छाती पर बार करूंगा।।
शहीद
बेटा तू बहादुर है, दुश्मन से मत डरना
हमारे हिन्द देश की रक्षा तुम करना।
अगर देखे कोई बुरी नजर से देश को
आंखों को निकाल तुम कंचे खेलना।।
शहीद का बेटा
दुश्मन हमारा पूरा बचपन निगल गया है
किताबो की जगह हथियार थमा गया है।
बेरियों की आंखों से कंचे तो खेलेंगे ही
नही छोड़ेंगे,अपना दुश्मन से मिल गया है।।
शहीद
बेटा सच कहा अपने भी गद्दार बने हैं
अपने देश में ही कई दुश्मन फले हैं।
दुश्मन की क्या मजाल, आंख उठाये
बेटा तू निभाना फर्ज, अदा कर चले हैं।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा

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