Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on August 16, 2018 with No comments
वो अटल थे....
वो अटल थे अपने इरादों पर
सम्मान करता था विपक्ष भी
आज तक ऐसा कवि, नेता
नहीं देखा जो था निष्पक्ष ही।।
कमी पूरी नहीं होगी शायद इनकी
जमाना भी याद करेगा इन्हें हरदम
देश का सच्चा ईमानदार नेता जो है
नहीं, विपक्ष की आंखें भी होंगी नम
शत - शत नमन इस महान कवि को
जिन्होंने ने लेखनी से भी सँवारा जहां।
भारत एक प्राचीन राष्ट्र है, स्वतंत्रता इसे
ही मिली है। नए को नही। ये था कहा।
जैसे मां की रहमतों का व्यख्यान नी हो सकता
किसी से इनकी ईमानदारी का भी नहीं होगा।
शत - शत नमन करूँ इस महान भारतरत्न को
जो शांतिप्रिय-महापुरुष था और सदा रहेगा।।
लेखक
💐शांतिप्रिय-महापुरुष को समर्पित कविता 💐

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