Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on April 28, 2020 with No comments | Categories: जल
जल संरक्षण
जल संरक्षित नही किया तो
पानी की बूंद को तरस जाएगा।
एक बून्द पानी नहीं रहा तो
तू प्यासा ही मर जायेगा।।
दिन प्रतिदिन घटता पानी
चिंता का विषय बन गया है।
गंदगी का पानी मे गिराना
एक अभिशाप सा बन गया है।
पोखरों से वाष्प लेकर
फिर बादल वर्षा करते है।
अगर पोखर ही नही रहे तो
वर्षा बिन देखना लोग कैसे मरते है।
बून्द बून्द कर बचा लो पानी
हा यही सही है हमारे लिए ।
नही तो भुगतना पड़ेगा नव पीढ़ियों को
पाप जो हमने किये।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा

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