Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on September 09, 2019 with No comments
चलो सखी सावन आया
चलो सखी सावन आया
नया सवेरा नई उमंग लाया,
अपनी सखियों ने भी
पीपल की घनी छाओं में
अपना अपना डेरा लगाया...
चलो सखी सावन आया।
गोल गोल घूमे,
मस्ती में सब झूमे
पीपल की छाओं में
हम झूला झूले
बचपन की यादें साथ लाया...
चलो सखी सावन आया।
मौसम की मस्त बहार
सावन की ठंडी फुहार
तन मन हुआ
शीतल हवा का शिकार
मन को बहुत भाया
चलो सखी सावन आया।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा

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