प्रेम का तराना
आज मैं मेरी संवादयिक रचना में एक अच्छे घर की संस्कारी बेटी और उसे अच्छे लगने वाले वास्तव में अच्छे लड़के दोनों के प्रेम के आलम को लिखने जा रहा हूँ.....
लडकी लड़के की प्यारी प्यारी, निहायत ही मनभावनी बातो से वशीभूत हो कर उस लड़के से कहती है।
लड़की
तू इतनी प्यारी बातें मत किया कर,
मेरे मन को बैचेनी मत दिया कर।
तुझे क्या पता , कैसे मन को काबू करती हूँ,
मेरा ख्याल रख जरा मैं लड़की से पहले
एक अच्छे खानदान की बेटी हूँ।
अब देखो इस लड़की ने अपने दिल की बेचैनी को उपरोक्त पंक्तियों में वयां कर दिया। अब लड़के ने पता क्या जवाब दिया? सुनिए
लड़का
मैं ऐसा ही हूँ, बताओ क्या करूँ ?
आप कहते हो तो बात ना करूँ?
आदत है, जो मन में है सो कह देता हूँ,
अगर आप अच्छे खानदान की बेटी हो तो
मैं भी एक आज्ञाकारी बेटा हूँ।
(अब लड़के की 'बात न करने' की बात सुनकर लड़की का मन और ज्यादा व्याकुल हो जाता है। लेकिन प्यार का इजहार पहली बार में करना बड़ा मुश्किल होता है। फिर मन समझाकर कहती है-)
लड़की
हा ठीक है, बस यही ठीक रहेगा।
तभी सुकून से समय बीत सकेगा।
तेरे बारे सोच, वक्त जाया कर लेती हूँ,
मेरा ख्याल रख जरा मैं लड़की से पहले
एक अच्छे खानदान की बेटी हूँ।
(अब लड़का उससे पूछता है कि)
लड़का
क्यूँ सोचते हो आप मेरे बारे में?
क्यूँ बांधा है दिल के पिटारे में?
चलो, नहीं करता बात मैं आज कह देता हूँ,
अगर तुम अच्छे खानदान की बेटी हो तो
मैं भी एक आज्ञाकारी बेटा हूँ।
(लड़की को पता है कि लड़के से बात किये बिना वो रह नही सकती। अब आगे लड़की कहती है-)
लड़की
अरे! बाबा तू मेरी क्यों सुनता है...?
मेरे दिल की क्यों नहीं सुनता है...?
अब कैसे बताऊं तुझे दिल मे बसाए बैठी हूँ,
मेरा ख्याल रख जरा मैं लड़की से पहले
एक अच्छे खानदान की बेटी हूँ।
(ये सुनकर लड़का ख़ास लहजे से सिर हिलाकर मुस्करा देता है और कहता है-)
लड़का
इतनी देर क्यों लगा दी इजहार में?
हा, मैं भी फना हूँ प्रिय तेरे प्यार में।
दिल देकर, दिल का कमरा खाली कर बैठा हूँ,
अगर तुम अच्छे खानदान की बेटी हो तो
मैं भी एक आज्ञाकारी बेटा हूँ।
यह सुनकर लड़की खिलखिलाकर हसने लगी, और बोली
लड़की
मेरे लिए तूने दिल का कमरा खाली किया?
ले आज से मेरा दिल भी मैंने तुम्हे दे किया।
चुप रहना, जगत् से बचकर, कह देती हूँ
मेरा ख्याल रखना जरा मैं लड़की से पहले
एक अच्छे खानदान की बेटी हूँ।
(अब लड़के ने सुंदर सा जवाब दिया)
ठीक, तेरे बाबुल की पगड़ी का ध्यान रखूंगा
तेरे धवल दामन पर भी दाग न लगने दूंगा।
तू चिंता न कर, पूरा करता हूँ जो भी मैं कहता हूँ।
अगर तुम अच्छे खानदान की बेटी हो तो
मैं भी एक आज्ञाकारी बेटा हूँ।
दोनों एक दूसरे को पाकर खुश हो गए और अब तक खुश है।
स्वरचित
सुखचैन मेहरा

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