Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on February 14, 2018 with No comments
दिल-रुबा और जमाना (दो पंक्तिया लव पर )
*दो मिनट का समय निकालकर जरुर पढ़ना*
प्यार की तोहीम करना तो जमाने की आदत बन गयी है न जाने क्या
मिलता है जमाने को ऐसा करके ? कुछ ऐसा ही हुआ दिल और रुबा के साथ | देखने में
सिंपल थे दोनों | कालेज में न किसी से ज्यादा बोलना बस अपने ही से मतलब था |
एक रोज रुबा बगीचे के एक साइड में
अकेली बैठी थी और दिल भी वहीं आकर बैठ गया और बैठा रहा बोला कुछ नहीं बोला | फिर
रुबा ने दिल से फादर-डे विश किया | आपको भी......(एक हल्की सी मुस्कान के साथ | )
मैं अपने पापा से बहुत प्यार करता हूँ....हर इच्छा पूरी करते है.. और आपके पापा क्या करते है ? नहीं है.....रुबा ने
अतीत को याद करती नजरों से जबाब दिया | सॉरी ....| नहीं कोई बात नहीं | दिल
इस तरह उन्हें आपस में बातें करना
अच्छा लगने लगा | घर पर भी रुबा का व्यवहार बदल गया...जो उसकी माँ ने साफ महसूस कर
लिया था | पूछने पर कुछ भी नहीं बोली | बस चुपचाप अपने रूम में चली गयी |
इस बार रुबा की माँ ने उससे पूछ ही लिया कि, ‘ बेटा क्या
बात है, दिनभर चुपचाप सी रहती है...? नहीं
माँ (लज्जाई मुस्कान के साथ) | कौन है वो लड़का...? मेरे से क्या छुपाना बेटी..?
माँ वो मेरे साथ ही कालेज में पढ़ता है | फ़िलहाल तो तू अपनी पढाई पर ध्यान दे..| ये
सब भूल जा | ठीक है, माँ. | माँ उसको समझाती रही लेकिन हाथों में तकिया लिए सुनती
रही | बस सुन ही रही थी लेकिन शायद समझ कुछ नहीं आ रहा था उसे | छुटियाँ खत्म हुई
| दिल और रुबा प्यार के बंधन में बंधते चले गये जो साथ वालों के नही हजम हो रहा था
|
उन्होंने दिल और रुबा को अलग करने
के इरादे से दिल-रुबा के जैसी पोशाक में एक अपने ही दोस्तों की एक आपतिजनक (आभासी
) फोटो लेली | रुबा की माँ को दिखा दी | रुबा की माँ ने वह फोटो अपने पास रख ली |
जब रुबा कालेज से लौट कर आई तो उसकी माँ ने उसे फोटो दिखाते हुये कहा (गुस्से से),
‘ये क्या है.....? माँ के हाथ में वह फोटो रुबा को कुछ समझ नहीं आया | माँ ये मैं
नहीं हूँ मेरा विश्वास करो माँ | आपकी इज्जत को मैं जमाने में कभी नही उछालुंगी
| रुबा की ये बात सुनकर उसकी माँ का गुस्सा शांत हो गया | आखिर पड़ी लिखी थी | माँ
ने अपने भाई से उस लडके के बारे में पता करने को कहा | पता चला की वह अच्छे घर का
लड़का है | वे लड़के वाले के घर रिश्ता लेकर गये लेकिन उन्होंने ये कह कर मना कर
दिया कि, ‘ हमारे बेटे ने लड़की ढूंड ली है और उसकी ख़ुशी में हमारी ख़ुशी है |’ हमारे बेटे को हम जानते है वह कभी गलत निर्णय नहीं लेगा|
घर आकर सब कुछ बता दिया | रुबा को
अभी भी पूरा यकीं था की दिल ऐसा नहीं कर सकता लेकिन उस फोटो ने रुबा ने थोड़ा
भ्रमित तो जरुर कर दिया था | अगले दिन रुबा ने दिल से पुरे दिन बात नहीं की जब भी
दिल उसे बुलाने की कौशिश करता तो कहीं और जाकर बैठ जाती | साथ वाले बहुत खुश थे
दोनों को इस तरह देख कर |
अल सुबह दिल माँ-बाप रुबा के घर
पहुंचे (दिल के पसंद की लड़की का रिश्ता लेने के लिए) | ये सब देख रुबा की माँ और
दिल के माँ बाप हैरान रह गये | अच्छा तो वह आपकी बेटी को ही पसंद करता है | रब ने
भी क्या सयोंग बनाया जमाने की लाख कौशीशों के बाबजूद दिल और रुबा एक हो गये | वो
कहते हैं ना, ‘जब प्यार सच्चे दिल किया जाए तो उसे दुनियां की कोई भी
ताकत डिगा नहीं सकती है |’ ये कहानी सभी (सच्चा) प्यार करने वालों को समर्पित है
आप सब को मेरी तरफ से ‘हैप्पी वैलेंटाइन-डे’ |
लेखक: सुखचैन मेहरा, सम्पर्क सूत्र :- 9460914014

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