June 11, 2019 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments Posted in
Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह on June 11, 2019 with No comments | Categories:

"क्यों करता हूँ मोह मैं इतना,  चलो कम कर देता हूँ
क्यों जताता हूँ हक मैं इतना, चलो कम कर देता हूँ।
दुनियां की नजर है बुरी मेरे हमदम अलग कर देगी
क्यों हसाता हूँ तुम्हें मैं इतना, चलो कम कर देता हूँ।।"

"दो दिन है जिंदगानी के, जी भर के जी लेने दो
दिल में छुपाए राज आज मुझे तुम कह लेने दो।
मैं रूठूँ  तो  मत  मनाना, मैं   बुरा  नहीं मानूँगा
तेरे संग रहना है अब, बस सुकून से रह लेने दो।।"

स्वरचित
सुखचैन मेहरा


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