June 22, 2020 Posted by कलमरथ हिंदी साहित्य समूह No comments Posted in
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वीर सैनिक

तिरंगे में लिपटी लाशों को देख सबके ही दिल रोते है
जो पहन के निकले थे वर्दी वो कफ़न में लिपटे लौटे है
क्या सन्देश सुनाये भारत माँ को जिसने नाजो से पाले थे
थे बलवान बड़े तेरे बेटे जिसने दुश्मन पर घेरे डाले थे
बोल भारत माँ के जयकारे थे दुश्मनो पर वे टूट पड़े
देख तेरे बलवानो का शौर्य दुश्मन के पसीने छूट पड़े
क्या बतलाऊ उनकी ताकत को वे एक ही सौ पर भारी थे
जब तक थी आखिरी सांस भी उनमे उनके तांडव जारी थे
लड़े वे वीर बलवानो जैसे रौद्र रूप दिखाया था
देख अदम्य साहस उनका हिमालय ने शीश झुकाया था
घाटी में वीरों ने दुश्मन को भारत का साहस दिखलाया था
जो भारत का अहित है सोचते उनको यह बतलाया था
पहले वाला दौर न समझो यह पहले वाला दौर नहीं
भारत से करने का मुकाबला तुम में अब इतना जोर नहीं
अब आँख उठा कर देखोगे तो तुमको सबक सिखाएंगे
गर पाँव रखा भारत में तो सीधा जहनुम पहुंचाएंगे
मारते मारते शहीद हुए और प्राण वीरों ने त्यागे थे
देख शेरों के साहस को गीदड़ फिर छोड़ के भागे थे
सुन वीरों की गाथा को माँ भारती की आँखे बहने लगी
न व्यर्थ जायेगी शहादत इनकी यह भारत माता कहने लगी
बदला लेने को देखो माँ चढ़ी सिंह सवारी है
भाग सको तो भागो दुष्टों अब आयी तुम्हारी बारी है
                                                          स्वरचित -: जनार्दन भारद्वाज
                                                             श्री गंगानगर( राजस्थान)

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